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कैसा है इसरो का सफल रॉकेट PSLV ?

इसरो का PSLV रॉकेट


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How is ISRO's successful rocket PSLV?


Janiye isro ka pslv rocket ke bare me

PSLV दुनिया का सबसे सक्सेस फुल रॉकेट में से एक है सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के हर एक उपग्रह को कक्षा में भेजने के लिए रॉकेट है तो चलिए जानते हैं कैसा है दुनिया का सबसे सक्सेस फुल सैटेलाइट लॉन्चिंग रॉकेट


भारत कि इसरो दुनिया की सबसे फेमस स्पेस एजेंसी में से एक है, इसरो ने बनाए हुए बहुत सारे रॉकेट जैसे के SLV, ASLV, PSLV, GSLV जैसे बहुत सारे लॉन्चिंग प्लेटफार्म है. लेकिन PSLV वह आज तक का सबसे सफल रॉकेट साबित हुआ है. PSLV का पूरा नाम पोलर सैटलाइट लॉन्च व्हीकल है. टोटल 44 मीटर ऊंचा है यानी 22 माले की बिल्डिंग जितना और वजन में 320 टन है । इसरो का यह रॉकेट आज दिन तक 37 बार सफल तरीके से सेटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचा चुका है. यह रॉकेट सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी उतना ही लोकप्रिय हैं दूसरा कोई भी विदेशी सैटेलाइट लॉन्चिंग सिस्टम से भी सस्ता भारत का PSLV है. और 100 परसेंट सफलता का रिकॉर्ड रखता है आज तक के कुल लॉन्चिंग में सिर्फ एक ही बार यह असफल रहा है

 PSLV इतिहास


इस रॉकेट की सबसे पहली डिजाइन 1990 किस साल में शुरू करने में आई थी टोटल 3 साल के रिसर्च और मेन डेवलपमेंट के बाद 1993 मैं इस रॉकेट को पहली बार अंतरिक्ष की ओर रवाना किया गया था इस रॉकेट की पूरी डिजाइन भारत के विज्ञानिक के जरिए विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर तिरुवंतपुरम के अंदर करने में आई थी इस दौरान दूसरे इंपॉर्टेंट पार्ट इसरो के तिरुनेलवेली खाते में महेंद्र गिरी के  LPSC सेंटर के जरिए डिजाइन करने में आई थी और फाइनल असेंबली श्री हरिकोटा केंद्र के धवन स्पेस सेंटर केंद्र द्वारा करने में आता है और यहां सेज इसरो के लॉन्चिंग पैड द्वारा हर एक सेटेलाइट का लॉन्चिंग करने में आता है इस PSLV रॉकेट की कीमत 150 करोड़ जितनी है हर लॉन्च के बाद एक नया PSLV बनाने में आता है

PSLV का स्टेज वन


इस रॉकेट में टोटल 4 स्टेज है पहला स्टेज दुनिया के सबसे बड़े सॉलि़ड रॉकेट मोटर शे बना हुआ है इस रॉकेट में टोटल 138 टन जितना फ्यूल होता है जो HTPB यानी के hydroxyl -terminated polybutadiene urethne-bound  से पहचाना जाता है और इसके जरिए 4800 किलोन्यूटन का थ्रस्ट उत्पन्न होता है जो रॉकेट को अंतरिक्ष तक पहुंचा जा सकता है उसके अंदर टोटल 2.8 मीटर के व्यास की दो मोटर आई हुई है जो खास चीजों के स्टील से बनाने में आती है । जिसका वजन 30 टन जितना होता है पहला स्टेज सिर्फ 105 सेकंड तक चलता है

PSLV के जरूरी FACT

नाम⟶⟶⟶⟶⟶⟶⟶⟶⟶पोलर सैटलाइट लॉन्च व्हीकल
बनाने वाला इसरो
देश भारत
ऊंचाई 44 मीटर
व्यास 2.8 मीटर
वजन 320 टन एक्सेल xl टाइप
स्टेज 4
वजन की क्षमता 3.8 टर्न LEO कक्षा मे
1.7 टन SSO कक्षा मे
1.4 टन जीटीओ GTO कक्षा में
बूस्टर रॉकेट 6
बूस्टर रॉकेट का टाइम 50 सेकंड
पहला स्टेज   138 टन
टाइम 105 सेकंड
दूसरे स्टेज का टाइम 158 सेकंड
तीसरे स्टेज का टाइम 83 सेकंड
चौथे स्टेज का टाइम 425 सेकंड
प्रसिद्ध मशीन चंद्रयान, मार्स आर्बिटर मशीन, नाविक एस्ट्रो सेट



PSLV का स्टेज दूसरा 

स्टेज के साथ में 6 ज्यादा रॉकेट होते हैं जिसे स्ट्रैप ऑन बूस्टर भी कहा जाता है यह रॉकेट ज्यादा थ्रस्ट पैदा करके रॉकेट को अंतरिक्ष तक चढ़ाने में मदद करता है । इसमें पहले स्टेज के रॉकेट के साथ में पहले चार बूस्टर रॉकेट को शुरू करने में आता है और दूसरे दो बूस्टर रॉकेट लॉन्च के 25 सेकंड बाद में चालू करने में आता है इस हर एक छोटे बूस्टर रॉकेट में 12 टन जितना फ्यूल भरने में आता है जो सिर्फ 40 सेकंड तक ही चलता है

दूसरा स्टेज 1 लिक्विड फ्यूल के द्वारा चलता है दूसरे स्टेज के एनजिन का नाम विकास रखने में आया है जिसका वजन 41.5 टन है टोटल 2 तरह के फुल उपयोग में होते हैं जिसमें पहला है unsymmetrical dimethylhydrazine (UDMH) जो इंपॉर्टेंट फ्यूल के लिए और दूसरा है Nitrogen tetroxide (N2O4) जो ऑक्सिडाजर की तरह काम करता है 800 किलो न्यूटन थ्रस्ट पैदा करता है या स्टेज 158 सेकंड तक ही चलता है

PSLV का तीसरा स्टेज 


तीसरे स्टेज के लिए कुल मिलाकर 7 टन फ्यूल उपयोग होता है जो HTPB होता है कुल मिलाकर ये 83 सेकंड तक चलता है उसके बाद चौथा और आखिरी स्टेज चालू होता है जो दो छोटे एंजिन द्वारा चलता है इस एंजिन में टोटल 2.5 टन जितना फ्यूल होता है जे सबसे लंबा यानी के 425 सेकंड तक चलता है

रॉकेट भारत के कुल मिलाकर 47 ऑर विदेश के 66 उपग्रह को सफलता पूर्वक अंतरिक्ष में भेज चुका है जिसमें से सिर्फ एक ही असफल गया है इस रॉकेट के अलग-अलग कुल तीन तरह के रॉकेट रखने में आए हैं

1. PSLV-G: ईस तरह का रॉकेट 4 स्टेज वाला रॉकेट है जो एक 1600 किलो के उपग्रह को 662 किलोमीटर ऊंचा sso कक्षा में भेज सकता है

2. PSLV-CA:CA: अर्थ कौर अलोन (CORE ALONE) होता है कम वजन के सेटेलाइट को भेजने के लिए इसका उपयोग होता है इस तरह के रॉकेट में 6 बूस्टर रॉकेट उपयोग करने में नहीं आते कुल मिला के इस तरह का रॉकेट 1100 किलो का उपग्रह अंतरिक्ष तक भेज सकता है

3. PSLV-XL: सबसे ज्यादा पावरफुल और 320 टन वजनदार. इस तरह के रॉकेट 1800 किलो उपग्रह को अंतरिक्ष तक भेजने में उपयोग होता है भारत के मंगलयान चंद्रयान जीसैट जैसे बड़े सेटेलाइट में उपयोग करने में आता है

4:PSLV-DL: इस रॉकेट में सिर्फ 2 स्ट्रेप ऑन बूस्टर लगाए हुए होते हैं जिसमें 12 टन फ्यूल रखने में आता है

5:PSLV-QL: इस रॉकेट में चार्ट स्ट्रैप ऑन बूस्टर लगे हुए होते हैं जिसमें 48 टन जितना फ्यूल रखने में आता है

अभी इसरो PSLV से भी ज्यादा शक्तिशाली ऐसा GSLV रॉकेट का विकास कर रहे हैं क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन द्वारा ये GSLV जो सफल रहा तो भारत 4 टन जितना उपग्रह अंतरिक्ष में भेज सकेगा

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